भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमत दुनिया के कई देशों से कम, पड़ोसी देशों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं से तुलना में बड़ी राहत
भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है। हालांकि हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जा रही एलपीजी सिलेंडर की कीमत कई पड़ोसी देशों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। सरकारी आंकड़ों और सार्वजनिक रूप से साझा की गई जानकारी के मुताबिक भारत में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत कई देशों की तुलना में सबसे कम श्रेणी में बनी हुई है।
तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत वर्तमान में लगभग ₹942 है। वहीं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए प्रभावी कीमत लगभग ₹642 बताई गई है। यह कीमत पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में उपलब्ध घरेलू गैस की कीमतों से काफी कम है।
भारत के पड़ोसी देशों में कितनी है एलपीजी की कीमत
रिपोर्ट के अनुसार भारत के पड़ोसी देशों में रसोई गैस की कीमतें भारत से अधिक हैं। पाकिस्तान में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग ₹1,046 बताई गई है। वहीं नेपाल में इसकी कीमत करीब ₹1,207 है। बांग्लादेश में उपभोक्ताओं को लगभग ₹1,225 और श्रीलंका में ₹1,241 तक भुगतान करना पड़ रहा है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारत में एलपीजी उपभोक्ताओं को पड़ोसी देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम कीमत पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेष रूप से उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली सब्सिडी के कारण उनकी वास्तविक लागत और भी कम हो जाती है।
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भारत की अर्थव्यवस्था, आयात और ऊर्जा कीमतों पर रुपये की मजबूती या कमजोरी का सीधा असर पड़ता है। हाल के वर्षों में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिसका प्रभाव पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी जैसी आयातित ऊर्जा पर भी पड़ता है।
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विकसित देशों में भी भारत से और अधिक महंगी है रसोई गैस
केवल पड़ोसी देशों ही नहीं, बल्कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भी एलपीजी की कीमतें भारत की तुलना में काफी अधिक हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग ₹1,755 तक पहुंच जाती है। ऑस्ट्रेलिया में भी यह कीमत करीब ₹1,765 बताई गई है।
सबसे अधिक कीमत कनाडा में दर्ज की गई है, जहां उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के लिए लगभग ₹2,411 तक खर्च करना पड़ता है। यह भारत की सामान्य कीमत से ढाई गुना से भी अधिक है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना करने पर भारत में एलपीजी की कीमत अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है।
प्रधानमंत्री की उज्ज्वला योजना से करोड़ों परिवारों को राहत
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य गरीब और ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को एलपीजी कनेक्शन और सब्सिडी का लाभ दिया जाता है।
तुलना सूची में उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए प्रभावी एलपीजी कीमत ₹642 दिखाई गई है, जो सूची में शामिल सभी देशों की तुलना में सबसे कम है। इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को रसोई खर्च में बड़ी राहत मिलती है।
क्या है एलपीजी कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण
एलपीजी की कीमतें केवल घरेलू नीतियों से तय नहीं होतीं। इसके पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कारक जिम्मेदार होते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और गैस की कीमतें
- डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर
- आयात लागत और परिवहन खर्च
- सरकारी कर एवं सब्सिडी
- वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसके बावजूद सरकार समय-समय पर सब्सिडी और अन्य राहत उपायों के माध्यम से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ कम करने का प्रयास करती है।
भारत में LPG सिलेंडर की कीमतों पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय तुलना करते समय प्रत्येक देश की आय, कर संरचना और सब्सिडी व्यवस्था को भी ध्यान में रखना चाहिए। हालांकि उपलब्ध आंकड़े यह दर्शाते हैं कि भारतीय उपभोक्ताओं को कई देशों की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर घरेलू गैस उपलब्ध हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है, इसलिए एलपीजी कीमतों में भी समय-समय पर बदलाव देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों की तुलना में कम है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए यह कीमत और भी कम होकर ₹642 तक पहुंच जाती है। बढ़ती महंगाई और वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों के बीच यह तुलना भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर मानी जा सकती है।





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